गीत/नवगीत

गीत

एक क्रान्ति का सहारा बन गए कबीर जी।
शांत शुभमन का किनारा बन गए कबीर जी।

अंधविश्वासों एंव पाखण्डों की निंदा की है।
उम्र सारी खोज एंव अलंकार अन्दर बीती है।
धरत अम्बर का सितारा बन गए कबीर जी।
एक क्रान्ति का सहारा बन गए कबीर जी।

शब्द में उद्यम तथा शक्ति का सहारा भर दिया
दीपकों में सूरजों का नाम सच्चा धर दिया।
वक्त का अदभुत नज़ारा बन गए कबीर जी।
क्रान्ति का सहारा बन गए कबीर जी।

देकर इक संदेश मानवता को सांझीवाल का।
दुष्कर्म में काम आता जो सुरक्षित ढाल का।
दिव्य ज्योति का मुनारा बन गए कबीर जी।
एक क्रान्ति का सहारा बन गए कबीर जी।

नीतियों एंव रीतियों को देकर नवयुग वार्ता।
फिर बहा दी सोच में एक अंचभित सारिका।
सोच का बुलंद द्वारा बन गए कबीर जी।
एक क्रान्ति का सहारा बन गए कबीर जी।

आदमी को जीने के सब दे दीए हैं रास्ते।
ज्ञान भक्ति और सिमरन ज़िंदगी के वास्ते।
शुभ इच्छाओं का फुव्वारा बन गए कबीर जी।
एक क्रान्ति का सहारा बन गए कबीर जी।

काव्य में अनमोल दोहे रच दिए इतिहास में।
कामना एंव लालसा को रखा ना विश्वास में।
भारत मां का एक दुलारा बन गए कबीर जी।
एक क्रान्ति का सहारा बन गए कबीर जी।

सूख सकती ही नहीं जो खिल रही हैं डालियां।
बालमा अर्थों में हैं खुशहालियां हरियालियां।
बह रहे निर्झर की धारा बन गए कबीर जी।
एक क्रान्ति का सहारा बन गए कबीर जी।

— बलविन्दर बालम

बलविन्दर ‘बालम’

ओंकार नगर, गुरदासपुर (पंजाब) मो. 98156 25409

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