स्वास्थ्य

मूत्र या रक्त में क्रिएटिनिन का स्तर

क्रिएटिनिन एक ऐसा अपशिष्ट पदार्थ या विकार है, जिसको हमारे गुर्दे खून से छानकर अलग करते हैं। मूत्र या रक्त में क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ने का मुख्य कारण किडनी या गुर्दों का कमजोर होना है। जब गुर्दे रक्त से अपशिष्ट पदार्थों को ठीक से छान नहीं पाते या डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) होती है, तो क्रिएटिनिन जमा होने या बढ़ने लगता है।
खून में क्रिएटिनिन का स्तर तय करता है कि गुर्दे किस तरह से काम कर रहे हैं। यदि वे सही काम नहीं कर रहे हैं तो खून में क्रिएटिनिन स्तर बढ़ जाता है। जब तक हमारे गुर्दे सही कार्य करते हैं, तब तक क्रिएटिनिन की मात्रा नियंत्रित रहती है। इसे मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर (mg/dL) में मापा जाता है। सामान्य क्रिएटिनिन स्तर पुरुषों में 0.74 से 1.35 mg/dL और महिलाओं में 0.59 से 1.04 mg/dL होता है। यदि यह स्तर 1.5 mg/dL से अधिक जाता है, तो इसे किडनी की कार्यक्षमता में कमी का संकेत माना जाता है।
किडनी की स्थिति को समझने के लिए क्रिएटिनिन के स्तर को इस प्रकार देखा जाता है-
प्रारंभिक क्षति- 1.2 से 1.5 mg/dL होना लगभग 30% किडनी की क्षति का संकेत होता है।
मध्यम क्षति- 2.0 से 3.0 mg/dL के बीच का स्तर किडनी की अधिक खराबी को दर्शाता है।
गंभीर स्थिति- 5 mg/dL से ऊपर का स्तर गंभीर किडनी खराबी (क्रोनिक किडनी डिजीज) की चेतावनी है।
डायलिसिस की आवश्यकता- क्रिएटिनिन 8 से 10 mg/dL होने या इसके साथ गंभीर लक्षण दिखने पर डॉक्टर डायलिसिस करने का निर्णय लेते हैं।
अन्य अधिकांश रोगों की तरह गुर्दों का कमजोर होना भी हमारी गलत जीवनशैली का परिणाम होता है। क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ने के मुख्य और सामान्य कारण निम्नलिखित हैं-
गुर्दे की समस्याएं- क्रिएटिनिन मुख्य रूप से गुर्दों द्वारा फिल्टर किया जाता है। गुर्दे खराब होने या ठीक से काम न करने पर यह खून में जमा होने लगता है।
जल की कमी (डिहाइड्रेशन)- शरीर में पानी की कमी के कारण भी क्रिएटिनिन का स्तर अस्थायी रूप से बढ़ सकता है।
भारी व्यायाम- अपनी आवश्यकता से अधिक व्यायाम करने से मांसपेशियों के टूटने के कारण भी यह स्तर बढ़ सकता है।
उच्च रक्तचाप और मधुमेह- ये दोनों स्थितियां गुर्दे को नुकसान पहुंचाती हैं और क्रिएटिनिन बढ़ा सकती हैं।
दवाएं- कुछ दर्द निवारक दवाओं के अत्यधिक उपयोग से भी किडनी प्रभावित होती है।
क्रिएटिनिन बढ़ने के लक्षण- यदि आपको हाथों-पैरों में सूजन, बार-बार पेशाब आना (या पेशाब में कमी होना), थकान, या भूख न लगने जैसे लक्षण अनुभव हो रहे हैं, तो इसे बिल्कुल उपेक्षित न करें और किसी योग्य डॉक्टर की सलाह लें।
क्रिएटिनिन बढ़ने की शिकायत प्रायः डायबिटीज़ के रोगियों को हो जाती है। इसको ठीक करने के लिए पूरे शरीर की कार्यप्रणाली को सक्रिय करना होगा और पाचन शक्ति को मज़बूत बनाना होगा।
ये कार्य ऐलोपैथिक या होमियोपैथिक दवाओं से कभी नहीं किये जा सकते। किन्तु प्राकृतिक चिकित्सा और योग के द्वारा इनको एक-दो माह में ही सरलता से किया जा सकता है। इस पद्धति के साथ किसी भी तरह की दवा लेना वर्जित है। इसमें कुछ विशेष क्रियाओं के साथ काफी परहेज भी करना पड़ता है।
क्रिएटिनिन का स्तर अधिक होने पर आपको अपने भोजन में प्रोटीन, नमक (सोडियम), पोटेशियम और फास्फोरस की मात्रा कम करनी चाहिए अर्थात् मिर्च-मसाले, रोटी, दाल, मैदा आदि कम करने चाहिए। इनके स्थान पर सेब, पपीता, पत्ता गोभी, खीरा और कम प्रोटीन वाले अनाज जैसे हाथ के कुटे चावल को शामिल करें। क्रिएटिनिन की मात्रा बढ़ने का एक बड़ा कारण पानी कम पीना भी होता है। इसलिए कम से कम ढाई-तीन लीटर जल प्रतिदिन अवश्य पीना चाहिए। दिनभर नियमित अन्तराल पर जल पीना गुर्दों की कार्यक्षमता बढ़ाने और बनाये रखने की कुंजी है।

डॉ. विजय कुमार सिंघल

नाम - डाॅ विजय कुमार सिंघल ‘अंजान’ जन्म तिथि - 27 अक्तूबर, 1959 जन्म स्थान - गाँव - दघेंटा, विकास खंड - बल्देव, जिला - मथुरा (उ.प्र.) पिता - स्व. श्री छेदा लाल अग्रवाल माता - स्व. श्रीमती शीला देवी पितामह - स्व. श्री चिन्तामणि जी सिंघल ज्येष्ठ पितामह - स्व. स्वामी शंकरानन्द सरस्वती जी महाराज शिक्षा - एम.स्टेट., एम.फिल. (कम्प्यूटर विज्ञान), सीएआईआईबी पुरस्कार - जापान के एक सरकारी संस्थान द्वारा कम्प्यूटरीकरण विषय पर आयोजित विश्व-स्तरीय निबंध प्रतियोगिता में विजयी होने पर पुरस्कार ग्रहण करने हेतु जापान यात्रा, जहाँ गोल्ड कप द्वारा सम्मानित। इसके अतिरिक्त अनेक निबंध प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत। आजीविका - इलाहाबाद बैंक, डीआरएस, मंडलीय कार्यालय, लखनऊ में मुख्य प्रबंधक (सूचना प्रौद्योगिकी) के पद से अवकाशप्राप्त। लेखन - कम्प्यूटर से सम्बंधित विषयों पर 80 पुस्तकें लिखित, जिनमें से 75 प्रकाशित। अन्य प्रकाशित पुस्तकें- वैदिक गीता, सरस भजन संग्रह, स्वास्थ्य रहस्य। अनेक लेख, कविताएँ, कहानियाँ, व्यंग्य, कार्टून आदि यत्र-तत्र प्रकाशित। महाभारत पर आधारित लघु उपन्यास ‘शान्तिदूत’ वेबसाइट पर प्रकाशित। आत्मकथा - प्रथम भाग (मुर्गे की तीसरी टाँग), द्वितीय भाग (दो नम्बर का आदमी) एवं तृतीय भाग (एक नजर पीछे की ओर) प्रकाशित। आत्मकथा का चतुर्थ भाग (महाशून्य की ओर) प्रकाशनाधीन। प्रकाशन- वेब पत्रिका ‘जय विजय’ मासिक का नियमित सम्पादन एवं प्रकाशन, वेबसाइट- www.jayvijay.co, ई-मेल: jayvijaymail@gmail.com, प्राकृतिक चिकित्सक एवं योगाचार्य सम्पर्क सूत्र - 15, सरयू विहार फेज 2, निकट बसन्त विहार, कमला नगर, आगरा-282005 (उप्र), मो. 9919997596, ई-मेल- vijayks@rediffmail.com, vijaysinghal27@gmail.com

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