राजनीति

कॉकरोच आंदोलन : शीर्षक ही सब कुछ कहता है

इस आंदोलन का पेपर लीक से कोई लेना देना नहीं है न छात्रों से न युवाओं के रोज़गार से ये तो बस शील्ड ढाल मात्र हैं यही वही अभिजीत दीपके है जिन्होंने पहले अन्ना का सहारा लेकर आप केजरीवाल आंदोलन चलाया विदेशों से छात्र युवा नौकरी छोड़ कर आए आम आदमी पार्टी बनी १० वर्ष तक दिल्ली धींगा मुश्ती का शिकार रही , भ्रष्टतम आरोप-प्रत्यारोप नाकामियों का ठीकरा केंद्र पर अराजकता ऐसी कि सरकार के नियम कायदे प्रक्रिया से कोई लेना देना नहीं.
अब कॉकरोच जनता पार्टी के रूप में प्रयोग 02 चल रहा है इस्तीफ़ा वो माँग रहे हैं जिन्होंने ने जेल में रहकर भी इस्तीफ़ा नहीं दिया .

सोनम वांगचुक जिन्हें इस आंदोलन का अन्ना बनाया गया है अनशन पर रहे .. २००७ से कांग्रेस के राज से अपराधी है जिन्हें २०० एकड़ ज़मीन पर कब्जे, चीन के हाथों में खेलने देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का नोटिस लेह के डीएम ने डा मनमोहन सिंह कांग्रेस सरकार के समय दिया गया. आज़ अनशन तोड़ दिया तोड़ना ही था जंतर मंतर पर अनशन का नाटक चल रहता अस्पताल में आते ही असलियत सामने आ जाती है इसलिये सरकारी से प्राइवेट अस्पताल चाहिए था , सरकार की लोकतंत्र की अपनी मजबूरियाँ है .अनशन बताते है सरकार के आश्वासन पर समाप्त हो गया .

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इसलिए निशाने पर है की कि इतिहास को दुरुस्त कर रहे हैं अलगाव वादियों का यह मंज़ूर नहीं भोले भाले छात्र ,युवा , महिलाएँ बच्चे शील्ड के रूप में उपयोग किए जा रहे हैं
आंदोलन का असली मकसद और बताये जाने वाले मक़सद में कोई दूर दूर का भी संबंध नहीं होता , फ़िल्मों से कुछ लोग मेसेज पढ़ने लगते है फ़िल्म का एक मात्र उद्देश्य क्या बिकता है निर्माता निर्देशक को रिफार्म से कोई लेना देना नहीं होता,राजनीति राजनीति है इसमें कोई सेवा नहीं, बस कुछ समझदार राजनीतिज्ञ राजनीति सकारात्मक माध्यम से करते हैं मुद्दे राष्ट्रवाद के , बहुसंख्यक धर्म के ,कोई जाति विशेष और अल्पसंख्यक धर्म के और कोई छद्म धर्मनिरपेक्षता के और कुछ कतई नकारात्मक मुद्दों से राजनीति करते हैं .

अमेरिका में रह रहा कोई व्यक्ति जर्मनी में रह रहे युवा के साथ षड्यंत्र रचे और टर्की से लाइक लेकर कॉकरोच पार्टी बनाये, हद यह है कि नाम ही स्वयं कॉकरोच पार्टी चुना है जो पैदा ही गंदगी में होते है और सफाई पर बाहर निकलकर आते हैं सफाई चल रही है . अभी और कॉकरोच बाहर आयेंगे .
समझ लीजिये कितना बड़ा षडयंत्र है विदेशों से ख़ाना आ रहा है दुबई से खाना आ रहा है बस फ्री खाओ सारे कॉकरोच इकट्ठे हो जाओ ,भूख हड़ताल के नाटक से शुरू आंदोलन .. अभी विदेशी खानों में बदल गया हैं , सारे कॉकरोचों को बाहर निकालो विदेशी खाना मिल रहा है .

इस आंदोलन को हवा और अराजकता को बढ़ावा देकर राजनैतिक पार्टियां अपनी कब्र खोद रही हैं आज भाजपा सरकार है कल दूसरी भी होगी चुनी हुई सरकारों को इस तरह अराजक तत्वों द्वारा ललकारा गया तो देश में लोकतंत्र का क्या होगा, या विपक्षी दल ये मान चुके हैं भाजपा को चुनाव में कभी हरा नहीं पायेंगे??

मैं ऐसा नहीं मानता की बीजेपी को चुनाव में नहीं हराया जा सकता कोई भी राजनैतिक दल कितना भी अच्छा काम कर ले समय के साथ पार्टियां गलती भी करती हैं और जनता की अपेक्षाएँ भी बड़ जाती हैं स्थायी कोई नहीं है , लेकिन अराजकता घातक है
भाजपा के पास फिलहाल सबसे हथियार एक देश एक चुनाव , मध्यावधि चुनाव कराकर पुनः जनता का विश्वास मत हांसिल करना , भाजपा इसके लिए तैयार है विपक्ष स्थिति जानता है इसलिए यह आंदोलन लंबा नहीं चलने वाला .

— पूरन डावर
चिंतक एवं विश्लेषक

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