कविता

सावन के त्यौहार

विधा- कविता
शीर्षक- सावन के त्यौहार

आया श्रावण मास, लाया खुशियों का विश्वास,
भगवान शिव की आराधना, प्रभु-मिलन की आस।

बरसेंगे गगन से मेघ, तपित धरा की होगी तृप्त प्यास,
मानसून की फुहारें लाईं, किसान के मन में उजास।

चिलचिलाती गर्मी हुई कम, मौसम हुआ है सुहाना,
खुल गए तीर्थों के द्वार, हर भक्त हुआ भक्ति में मस्ताना।

लोग तामसिक भोजन छोड़ खाते, शुद्ध शाकाहारी आहार,
यही शुद्ध शाकाहारी आहार बनता, स्वस्थता का आधार।

श्रावण मास का हर सोमवार होता, एक अनूठा भक्तिमय त्यौहार,
शिव जी की पूजा-आराधाना से, ‘ॐ नमः शिवाय’ का गुंजार।

हरियाली तीज, नाग पंचमी, रक्षा बंधन त्यौहार मनाए जाते,
कांवड़ यात्रा, संकष्टी गणेश चौथ, शीतला सातह भी सावन में आते।

कामदा एकादशी, स्वामी करपात्री-तुलसीदास जयंती आते,
पुत्रदा एकादशी, भौम प्रदोष व्रत, श्रावणी पूर्णिमा भी मनाते।

श्रावणी पूर्णिमा को पूर्णिमा स्नान-दान कर, मनाते रक्षाबंधन पर्व,
इसी दिन संस्कृत दिवस भी मनाते, जो है हमारी संस्कृति का गर्व।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244