कविता

धरती माँ की पुकार

धरती माँ आज बहुत उदास है,
सूनी उसकी हर एक साँस है।
कहीं कटते वन, कहीं सूखी धार,
सुनो मनुष्य! उसकी करुण पुकार।

जिस आँचल में जीवन पलता था,
हर मौसम हँसकर खिलता था।
वही आँचल अब फटा हुआ है,
हर सपना जैसे बिखरा हुआ है।

नदियाँ रोती हैं चुपके-चुपके,
पहाड़ खड़े हैं सहमे-सहमे।
पक्षी ढूँढ़ें अपना आशियाना,
कहाँ मिलेगा उनको ठिकाना?

धुआँ निगल रहा नीला अम्बर,
जलता जाता है वन का अंतर।
लोभ की आग में अंधा इंसान,
भूल गया धरती का सम्मान।

धरती माँ फिर भी मौन खड़ी है,
ममता उसकी आज भी बड़ी है।
हर मौसम में देती उपहार,
फिर भी सहती रहती प्रहार।

आओ मिलकर प्रण यह लें,
हर आँगन में पौधे रोपें।
जल, जंगल और भूमि बचाएँ,
जीवन के सच्चे गीत सुनाएँ।

धरती माँ फिर मुस्काएगी,
हरियाली फिर लौट आएगी।
जब प्रेम से उसको अपनाएँगे,
तभी भविष्य सुरक्षित पाएँगे।

— डॉ. मुल्ला आदम अली

डॉ. मुल्ला आदम अली

जन्म तिथि : 26 सितंबर तिरुपति, आंध्र प्रदेश शिक्षा : एम.ए., पीएच.डी., डी.एफ़.ए.च एण्ड टी., एचपीटी., वेबसाइट ; https://www.drmullaadamali.com यूट्यूब चैनल; https://youtube.com/@drmullaadamali प्रकाशित कृतियाँ : "मेरी अपनी कविताएं" "हिंदी कथा-साहित्य में देश-विभाजन की त्रासदी और सांप्रदायिकता" "युग निर्माता प्रेमचंद और उनका साहित्य", "नन्हा सिपाई", 24 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेख प्रकाशित, 30 से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में भाग लिया गया है, कई पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां और कविताएं प्रकाशित। पुरस्कार व सम्मान : एंटी करप्शन फाउन्डेशन द्वारा “नेशनल एजुकेशन आइकन अवॉर्ड – 2019” सोसाइटी फॉर यूथ डेवलेपमेंट द्वारा “स्वामी विवेकानंद युवा सम्मान – 2019”, विश्व संवाद परिषद की ओर से हिंदी साहित्य एवं काव्य सभा (प्रकोष्ठ) के लिए अवैतनिक प्रदेश अध्यक्ष (आंध्र प्रदेश) 2021.