सवेरे की सौगात
सुबह की प्रकृति है एक कोमल गीत,हर किरण में बसता है जीवन का मीत।ओस की बूँदें, जैसे मोती हों धरती
Read Moreसुबह की प्रकृति है एक कोमल गीत,हर किरण में बसता है जीवन का मीत।ओस की बूँदें, जैसे मोती हों धरती
Read Moreबिना मनुष्य के भी थी प्रकृति संपूर्ण,नदियाँ बहती थीं, थी हरियाली पूर्ण।पेड़ों की शाखें लहराती थीं मुक्त,न था कोई शोर,
Read Moreन कर छेड़खानी तू धरती से प्यारे,ये पेड़ हैं जीवन के सच्चे सहारे।नदियों की धारा, पवन की रवानी,सब कहते हैं
Read Moreजंगल ये जंगल, हरियाली का घर,पेड़ों की छाया, नदियों का स्वर।पंछी जो चहके, जैसे गीत गाएँ,हर कोना बोले, बस शांति
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