बाल कविता – नंद के घर कान्हा आए
नंद के घर कान्हा आए,
संग में खुशियाँ खूब लाए।
मैया यशोदा हँसती जाए,
माखन मिश्री उन्हें खिलाए।
नन्हे कान्हा प्यारे-प्यारे,
सबके मन को लगते न्यारे।
माथे मोर-मुकुट लहराए,
कान्हा जब मुरली बजाए।
गोकुल में उत्सव छा जाए,
हर आँगन मुस्कान सजाए।
ग्वाल-बाल संग धूम मचाएँ,
नाचें, गाएँ, खूब रिझाएँ।
दही-मटकी ऊपर लटकाएँ,
कान्हा उसको फोड़ने जाएँ।
मिल-जुलकर जब हाथ बढ़ाएँ,
हँसते-हँसते माखन पाएँ।
कान्हा कहते प्यार लुटाओ,
मिलकर सबको गले लगाओ।
सच की राह हमेशा जाना,
सबसे प्रेम करो मुस्काना।
जन्माष्टमी पर्व सुहाना,
सबको भाता कृष्ण-कन्हैया।
राधे-कृष्ण का नाम जपाएँ,
खुशियों के दीपक हम जलाएँ।
— गोपाल कौशल भोजवाल
