मुस्कुराने की कोशिश जारी है
पलकों पर नमी है,
पर होंठों पर हंसी भारी है,
देख ऐ ज़िन्दगी,
मेरी मुस्कुराने की कोशिश जारी है,
भीतर एक समंदर ग़म का रोज़ उमड़ता है,
सांसों का हर धागा इस व्यथा से लड़ता है,
टूट चुके हैं ख़्वाब कई,
पर उम्मीद न हारी है,
देख ऐ ज़िन्दगी,
मेरी मुस्कुराने की कोशिश जारी है,
वक़्त ने दिए गहरे ज़ख़्म,
तक़दीर ने आज़माया है,
अपनों की बेरुख़ी ने भी हर मोड़ पर रुलाया है,
पर कांटों के इस सफ़र में भी राह मैंने संवारी है,
देख ऐ ज़िन्दगी,
मेरी मुस्कुराने की कोशिश जारी है,
दर्द को छुपाकर महफ़िल में हंसना सीख लिया,
आंसुओं को पीकर,
अंगारों पर चलना सीख लिया,
ये दिखावे की दुनिया है,
यहां पग पग अदाकारी है,
देख ऐ ज़िन्दगी,
मेरी मुस्कुराने की कोशिश जारी है,
थक चुका हूं ज़रूर,
मगर अभी ठहरा नहीं हूं मैं,
दुखों के इस घने साए में खोया नहीं हूं मैं,
सुबह की नई किरण पर आज भी हक़दारी है,
देख ऐ ज़िन्दगी,
मेरी मुस्कुराने की कोशिश जारी है।
— राजेन्द्र लाहिरी
