“विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा ।”
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि आजादी से कुछ दिन पहले 22 जुलाई 1947 को तिरंगा हमारे राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया गया!
इस विषय पर आज हम सभी को निम्नलिखित राष्ट्रीय अस्मिता के प्रश्नों पर गम्भीरता से विचार करना चाहिये……..
1 जब हमारा प्राणों से भी प्यारा तिरंगा राष्ट्रीय ध्वज है तो अब वह किसी विशेष राजनीतिक पार्टी का ध्वज क्यों?
2 क्या 22, जुलाई, 1947 को, जिस दिन हमारे तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया गया था तो उसी दिन, तिरंगे ध्वज को प्रयोग कर रही राजनीतिक पार्टी को अपना ध्वज बदलना नहीं चाहिए था?
3 क्या राष्ट्रीय तिरंगे ध्वज का उपयोग किसी भी राजनीतिक पार्टी द्वारा किया जाना ठीक है? क्या इससे “हर घर तिरंगा” अभियान में लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न नहीं होती है?
4 क्या हमारे तिरंगे का उपयोग करके राजनीतिक पार्टी हमारी राष्ट्रीय भावना का दुरुपयोग नहीं कर रही है और उसका राजनीतिक लाभ नहीं उठा रही है?
5 क्या जब राजनीतिक पार्टी की अपनी बैठकों, रैलियों और सभाओं के बाद हमारे तिरंगे के रूप में प्रयोग किये गये झंडियां, पोस्टर और बैनर को ज़मीन पड़े या कूड़े की गाड़ी में भरे जाते देखते हैं तो हमारी तिरंगे के प्रति आदर भावना आहत नहीं होती है?
6 क्या जिस प्रकार गुलामी के कालखंड में विदेशी शासन के विरुद्ध देशवासी हाथ में तिरंगा लेकर धरना, प्रदर्शन, अनशन करते थे, उसी प्रकार क्या अब स्वतंत्र भारत में भारतीय शासकों के विरुद्ध भारतीय लोगों द्वारा हाथ में तिरंगा लेकर राष्ट्र विरोधी और असंवैधानिक प्रदर्शन करना न्याय संगत है? क्या इस पर शीघ्र ही कानून बनाकर प्रतिबंध नहीं लगना चहिये?
7 क्या देश के कर्णधार व मुख्य चुनाव आयुक्त को शीघ्र ही हमारे तिरंगे को अपनी पार्टी के लाभ के लिये उपयोग कर रही राजनीतिक पार्टी को अपना ध्वज बदलने का आदेश नहीं देना चाहिये,?
8 क्या अपने राष्ट्रीय तिरंगे ध्वज की प्रतिष्ठा के लिए एक राष्ट्र स्तर का जनजागरण अभियान नहीं चलना चाहिये?
— प्रेम चन्द्र शुक्ल
