बस यूँ ही
बेखबर इस कदर की खबर भी नहीं,
तू इधर भी नहीं तू उधर भी नहीं।
इस क़दर तुझको ढूँढा है हर इक गली,
अब शहर में बचा कोई घर भी नहीं।
— सविता सिंह मीरा
बेखबर इस कदर की खबर भी नहीं,
तू इधर भी नहीं तू उधर भी नहीं।
इस क़दर तुझको ढूँढा है हर इक गली,
अब शहर में बचा कोई घर भी नहीं।
— सविता सिंह मीरा