कविता

हिंदी खुद अपनी पहचान

विधा- कविता
शीर्षक- हिंदी खुद अपनी पहचान

शब्द-शब्द में हिंदी भाषा,
कण-कण में है हिंदुस्तान,
हिंदी है तो हम जीवंत हैं,
हिंदी खुद अपनी पहचान।

सबसे ज्यादा बोली जाती,
देश-विदेश में पाती सम्मान,
अब तो व्यापारी शिक्षा में भी,
हिंदी ने है बढ़ाई अपनी शान।

ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहाँ,
हिंदी भाषा की पहुंच नहीं है,
माँ की मीठी लोरी में है हिंदी,
पिता की आशीष जहाँ हिंदी वहीं है।

होली में हिंदी, दिवाली में हिंदी,
तिरंगे के तीन रंगों में हिंदी,
राधा-कृष्ण के प्यार में रमी है,
बंधी है राखी के धागों में हिंदी।

मीठी सरगम से सजती हिंदी,
माटी की खुशबू में रमती हिंदी,
हिंदी हिंदुस्तान का स्वाभिमान है,
भारत मां की सुता चहेती हिंदी।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

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