हिंदी, भावों की सहज अभिव्यक्ति
विधा- कविता
शीर्षक- हिंदी, भावों की सहज अभिव्यक्ति
हिंदी हमारी आन-बान शान-पहचान है
भावों की सहज अभिव्यक्ति इसकी जान है,
सहज अभिव्यक्ति से हिंदी लोकप्रिय होगी,
हिंदी को शिखर तक पहुंचाना अरमान है!
भारत माँ के मस्तक पर सजी है हिंदी,
लोगों को एक सूत्र में पिरोती है हिंदी,
हिंदी के माध्यम से संवाद सहज हो जाता,
अब तो देश-दुनिया की चहेती है हिंदी।
सभ्यता-संस्कृति की वाहक है हिंदी,
नई पीढ़ी भी अपनाने लगी है हिंदी,
हर विषय तक पहुंच है इस भाषा की,
भारत को फिर से जगद्गुरु बनाएगी हिंदी!
मिट्टी की सोंधी खुशबू-सी महकती है हिंदी,
अपनत्व की भावना से चहकती है हिंदी,
भले ही हम विदेशी भाषाएं सीखें-पढ़ें,
विदेशी भी सीख रहे हैं हमारी भाषा हिंदी।
बदल रहा परिवेश यहाँ, बदल रहा समाज,
विदेशी भाषा भी है जरूरी नौकरी के लिये आज,
पर अपनी जड़ हिन्दी से दूरी न होने देंगे,
हिन्दी में संवाद ही बना रहेगा स्वर्णिम ताज।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
