मुक्तक/दोहा

गिरकर उठना सीख

बाजों से वह क्यों डरे, चिड़िया रखती पंख।
हिम्मत जिसके खून में, टूटे हर इक दंभ।।

गिरने का डर छोड़ दे, गिरकर उठना सीख।
ठोकर को हथियार कर, खींच जीत की लीक।।

झूठी ताकत मत दिखा, सच की अपनी धार।
एक अकेला सत्य भी, भारी पड़े हजार।।

मंजिल उनको ही मिले, जो लड़ते हर हाल।
किस्मत बैठी देखती, कर्म बदलते चाल।।

भाग्य भरोसे बैठकर, मत करना अभिमान।
कर्मों से जो जीतता, उसका ऊँचा मान।।

संकट जितना चीखता, उतना बढ़ता जोर।
हिम्मत वाला चुप रहे, फिर करता है भोर।।

दुश्मन चाहे सामने, मन में रखना धीर।
साहस की हुंकार से, काँपे हर जंजीर।।

चिड़िया छोटी देखकर, बाज न करना गर्व।
पंखों में जब आग हो, उड़ान बनती पर्व।।

चिड़ियों से सीखो जरा, पंख नहीं तलवार।
फिर भी रखती आसमां, पूरा वो अधिकार।।

— डॉ. प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh

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