कुछ नालायक बेटों ने
कुछ नालायक बेटों ने
बाप को विवश कर रखा है
कमाने के लिए
जो बुजुर्ग हो चुके हैं
कोई मजदूरी कर रहा है
कोई ई-रिक्शा चला रहा है
कुछ बुजुर्ग भीख मांग रहे हैं
कुछ सब्जियां बेच रहे हैं
जो सत्तर साल के करीब हैं
आराम करने का समय है
कुछ नाती पोतों के बीच में
कुछ तुतलाती बातें करने का है
कुछ ने तो
वृध्दाश्रम में भेज दिये हैं
धिक्कार है जो ऐसे बेटे हैं
घर में चैन की सांस ले रहे हैं
— जयचन्द प्रजापति ‘जय’
