कुर्सी पाने के लिए
हंस रहा है वह किसी का दिल दुखाने के लिए
झूठ फैलाए हमेशा कुर्सी पाने के लिए
बैलगाड़ी से चले पर फोन फ्लाइट मोड में
गाली बकता जैन जी खुद को बताने के लिए
सत्य को मिलते न पग,पर,पर मिले हैं झूठ को
एक छोटी सीख है यह भी जमाने के लिए
रोज दादी से करे वो प्यार कुछ क्षण के लिए
मित्र इंस्ट्राग्राम पर कुछ व्यूज पाने के लिए
आजकल कानून ऐसे बन रहे हैं देश में
दूरियां-दीवार दिल में कुछ बनाने के लिए
बन गया वह नशे का आदी हमेशा के लिए
बार जाता, मित्र की जो लत छुड़ाने के लिए
आजकल बेख़ौफ़ होकर बत्तमीजी कर रहा
एक बेरी देश में दंगा कराने के लिए
झोलियां भरकर उठा लाया खुशी की,आज मैं
गया था लेकर दुवा मां की,कमाने के लिए
— सुरेश मिश्र
