एक बूढ़ा कवि
सुनसान जगह पर
एक कवि बैठा है
कुछ कवितायें लिख रहा है
अब वह बूढ़ा हो गया है
मैंने पूछा,
आप अब सूखे पेड़ हो गये हैं
अब कलम संभलती नहीं
फिर क्यों लिख रहे हैं
कवि ने कहा,
भले मैं सूखा पेड़ हो गया हूँ
लेकिन मेरी कवितायें
सूखे पेड़ की तरह जलकर
दुनिया को रोशनी देगी
— जयचन्द प्रजापति ‘जय
