पापा का जब साथ हो
पापा की उँगली थामकर, चलता नन्हा लाल।
उसकी प्यारी मुस्कान से, खिलता घर-परिवार॥
पापा का जब साथ हो, डर कैसा संसार।
छोटी-सी इस उम्र में, सपने हैं हजार॥
नन्हे कदम बढ़ा रहे, आँखों में अरमान।
हँसता-खेलता बचपन ही, जीवन की मुस्कान॥
पापा संग जो घूमता, नन्हा मन मतवाला।
उसकी मीठी बात से, घर लगता उजियाला॥
नन्ही आँखों में बसे, सपनों के संसार।
प्यार मिले परिवार का, जीवन हो गुलज़ार॥
पापा बनकर दोस्त जब, थामे नन्हा हाथ।
बचपन की हर राह में, मिल जाता विश्वास॥
नन्ही हँसी सुनाइए, दूर करें संताप।
बच्चों के मुस्कान में, छिपा खुशी का आप॥
नन्हे मन में प्रेम हो, आँखों में हो ज्ञान।
ऐसे ही बच्चों से बने, सुंदर हिंदुस्तान॥
पापा का आशीष हो, माँ का सच्चा प्यार।
बच्चों की मुस्कान से, महके घर-संसार॥
— डॉ. सत्यवान सौरभ
