कविता – समस्या है कहां
शेयर बाजार में कर रखा है बड़ा इन्वेस्टमेंट
पोर्टफोलियो है डायवर्सिफाइड,
बेटा पढ़ता है सातवीं कक्षा में
डाॅक्टर बनाने के लिए
करवा दिया है कोचिंग में दाखिला
और वहां टाॅप करने के लिए
उसपर बना रखा है पूरा दबाव,
ऑफिस में बड़े अधिकारियों से
है बड़ी अच्छी सेटिंग
उनके आशीर्वाद से हो रही है अच्छी कमाई,
तीसरे फ्लैट के एडवांस पेमेंट के लिए
हो गया है पैसों का जुगाड,
पुश्तैनी संपत्ति के बंटवारे में
हो न जाए कहीं ऊंच-नीच
उसपर है मेरी पूरी नजर,
इंस्टा पर रील का
व्यू और लाईक बढ़ाने के लिए
कर रहा हूं मेहनत दिन-रात,
समाज में नाम और पहचान के लिए
लेता हूं बढ़-चढ़कर हिस्सा
सभी इवेंट को ऑर्गेनाइज करने में,
मेरा और मेरी पत्नी का
स्वास्थ्य भी है ठीक-ठाक
शुगर, बीपी, काॅलेस्टेरोल की दवा
लेता हूं नियमित रूप से,
करा रखा है मेडिकल इंश्योरेंस
पचास लाख का,
फिर भी
नहीं रहता है शांत चित्त कभी
रातों को आती नहीं है नींद,
पता नहीं
समस्या है कहां ?
समझ में आता क्यों नहीं ?
— मृत्युंजय कुमार मनोज
