मुक्तक/दोहा

मधुर विधान

फागुन में नैना मिले, चैत गले का हार।
बैसाखी पाती लिखी, जेठ हुआ गुलज़ार।।

आषाढ़ संग भीगे सपने, सावन मधुर संगीत।
भादों वादा प्रेम का, मन में जागी प्रीत।।

क्वार सुहानी सांझ है, कार्तिक मधुर उजास
अगहन तेरी याद में, जगती मन में प्यास।।

पूस रजाई संग हंसे, माघ रचे अरमान।
बारहमासों में प्रिये!अपना मधुर विधान।।

— मनु वाशिष्ठ

मनु वाशिष्ठ

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