धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

51 शक्तिपीठ आस्था मंदिर : भक्ति, शक्ति और माँ का अलौकिक शृंगार

कल से नवरात्रि के पावन अवसर पर 51 शक्तिपीठ मंदिर में माँ शक्ति की उपासना का दिव्य अनुष्ठान आरंभ होगा। नौ दिनों तक पूरा मंदिर माँ की आराधना, मंत्रोच्चार, हवन और पूजा-पाठ से गुंजायमान रहेगा। पुजारियों द्वारा विधि-विधान से किए जाने वाले इन अनुष्ठानों के बीच वातावरण में ऐसी दिव्यता और पवित्रता घुल जाती है, मानो साक्षात् शक्ति स्वरूपा माँ हमारे बीच विराजमान हों।

इन नौ दिनों में माँ का भव्य शृंगार विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। माँ का अलौकिक रूप, उनके मुखमंडल की दिव्य आभा और शृंगार की अनुपम छटा देखकर ऐसा प्रतीत होता है, मानो माँ स्वयं अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए साक्षात् प्रकट हो गई हों। माँ की छवि इतनी मनोहारी होती है कि श्रद्धालुओं की दृष्टि ठहर-सी जाती है और हृदय अनायास ही भक्ति एवं श्रद्धा से भर उठता है।

नवरात्रि के इन नौ दिनों में मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं रहता, बल्कि आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का जीवंत केंद्र बन जाता है। भक्तों की भीड़, मंत्रों की पवित्र ध्वनि, हवन की सुगंध और माँ के जयकारों से संपूर्ण परिसर भक्तिरस में डूब जाता है। हर ओर श्रद्धा का सागर लहराता है और प्रत्येक हृदय माँ के चरणों में अपनी मनोकामनाएँ अर्पित करता दिखाई देता है।

यह वह पावन समय है, जब भक्त और आराध्य के बीच की दूरी मानो मिट जाती है। मन को विश्वास होने लगता है कि माँ अपने भक्तों के बीच ही हैं—उनकी प्रार्थनाएँ सुन रही हैं, उनके दुःख हर रही हैं और अपने स्नेह एवं आशीर्वाद से सबका जीवन आलोकित कर रही हैं।

सचमुच, माँ का यह दिव्य शृंगार केवल आँखों को मोहित नहीं करता, बल्कि आत्मा को भी स्पर्श कर जाता है। यहाँ आकर ऐसा लगता है, मानो श्रद्धा को स्वर मिल गया हो, भक्ति को आकार और आस्था को साक्षात् माँ का रूप।

जय माता दी!

— साधना सिंह स्वप्निल 

साधना सिंह "स्वप्निल"

गोरखपुर में मेरा ट्रांसपोर्ट का बिजनेस है, मेरी शिक्षा लखनऊ यूनिवर्सिटी से हुई है, मैंने एम ए सोशल वर्क से किया है, कंप्यूटर से मैंने डिप्लोमा लिया है

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