कब जलेगा मन का रावण
कब जलेगा मन का रावण?
प्रश्न बड़ा विचारणीय है
क्योंकि आज यह प्रश्न हम ही नहीं
खुद रावण और मित्र यमराज भी पूछ रहे हैं
इतना ही नहीं हमसे अच्छे तो वो खुद को मान रहे हैं।
राम जी भी अब मौन हो सोच रहे हैं,
अपने आप से ही सवाल-जवाब कर रहे हैं।
क्या रावण को मारने का अपराध किया मैंने?
क्योंकि वह रावण तो अपना, अपने परिवार,
वंश, कुल, कुटुम्ब का उद्धार भर चाहता था,
सीता की आड़ में मेरे हाथों खुद मरना चाहता था।
मगर आज तो हजारों रावण बेखौफ घूम रहे हैं
स्वार्थ-लोभ की खातिर किसी भी हद तक
गिरने से भी नहीं सकुचा रहे हैं,
कब जलेगा इन सबके मन का रावण
इस बात के संकेत भी तो नहीं मिल रहे हैं,
फिर यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है
जिसे हम आप नजर अंदाज कर रहे हैं,
या रावण के खौफ से मुँह नहीं खोल पा रहे हैं,
कब जलेगा मन का रावण? तय ही नहीं कर पा रहे हैं,
और रावण का कवर फायर हम खुद बन रहे हैं,
कब जलेगा मेरे मन का रावण, इस पर विचार कर
हम मूर्खों में अपना नाम लिखाने से बच रहे हैं,
सच कहें! तो हम खुद रावण बनने की ओर बढ़ रहे हैं।
