कविता

दीपक की लौ

अँधेरी रात में, एक दीपक मुस्काया, तम ने सिर झुकाया।
नन्ही-सी लौ में, उम्मीदों का आकाश, जगमग विश्वास।
हवा ने छेड़ा, लौ ने फिर भी कहा, मैं नहीं बुझूँगा।
तेल की बूँदें, जीवन का समर्पण, प्रकाश का अर्पण।
मिट्टी का तन, भीतर उजियारा है, यही सहारा है।
निशा के आँचल, स्वप्नों के दीप जले, पथ स्वयं खुले।
लौ की भाषा, मौन में कहती बात, जीवन की सौगात।
तूफान आए, हौसला मत खोना, जलते ही रहना।
एक छोटी लौ, सौ सूरज का साहस, अंधकार पर विजय।
दीपक जलता, खुद को तिल-तिल खोकर, जग को रोशन कर।
भोर की पहली, किरण ने जब छुआ, तम कहीं न रहा।
लौ ने सिखाया, जीवन का अर्थ यही, बाँटो रोशनी।
जब तक साँसें, आशा का दीप जले, राहें खिल उठें।
न बुझने देना, मन के भीतर की लौ, यही जीवन-ज्योति।

— डॉ. अशोक, पटना

डॉ. अशोक कुमार शर्मा

पिता: स्व ० यू ०आर० शर्मा माता: स्व ० सहोदर देवी जन्म तिथि: ०७.०५.१९६० जन्मस्थान: जमशेदपुर शिक्षा: पीएचडी सम्प्रति: सेवानिवृत्त पदाधिकारी प्रकाशित कृतियां: क्षितिज - लघुकथा संग्रह, गुलदस्ता - लघुकथा संग्रह, गुलमोहर - लघुकथा संग्रह, शेफालिका - लघुकथा संग्रह, रजनीगंधा - लघुकथा संग्रह कालमेघ - लघुकथा संग्रह कुमुदिनी - लघुकथा संग्रह [ अन्तिम चरण में ] पक्षियों की एकता की शक्ति - बाल कहानी, चिंटू लोमड़ी की चालाकी - बाल कहानी, रियान कौआ की झूठी चाल - बाल कहानी, खरगोश की बुद्धिमत्ता ने शेर को सीख दी , बाल लघुकथाएं, सम्मान और पुरस्कार: काव्य गौरव सम्मान, साहित्य सेवा सम्मान, कविवर गोपाल सिंह नेपाली काव्य शिरोमणि अवार्ड, पत्राचार सम्पूर्ण: ४०१, ओम् निलय एपार्टमेंट, खेतान लेन, वेस्ट बोरिंग केनाल रोड, पटना -८००००१, बिहार। दूरभाष: ०६१२-२५५७३४७ ९००६२३८७७७ ईमेल - ashokelection2015@gmail.com

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