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रूप चौदस

विधा- कविता
शीर्षक- रूप चौदस

रूप चौदस की भोर सुहानी है आई,
अपने साथ खुशियों की बेला लाई।

तन-मन को निखारने की घड़ी आई,
उबटन-हल्दी की भीनी-सी महक छाई।

श्री कृष्ण से नरकासुर था हारा,
अंधेरों पर हावी हुआ उजियारा।

घर-घर में दीपों ने किया उजाला,
जन-जन खुशी से हुआ मतवाला।

रूप न केवल चेहरे की शोभा बढ़ाए,
मन की आभा ही रूप सौन्दर्य कहलाए।

उम्मीद-क्षमा-संवेदना के दीप जलें,
अंधेरों की कोख में उजियारे पलें।

मन स्वच्छ करने का संकल्प लेना है,
ईर्ष्या-द्वेष के तम को दूर कर देना है।

रूप चौदस की सबको हो बधाई,
सौंदर्य विजय पर्व की पावन बेला आई।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

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