कविता

माँ लक्ष्मी आई

विधा- कविता
शीर्षक- माँ लक्ष्मी आई

लक्ष्मी आई भर-भरकर धन लाई,
साथ में खुशियां भरकर लाई,
दीप जलाएं प्रेम के हम-तुम,
मिटाने मन का अंधेरा आई।

स्वर्णिम आभा लेकर आई,
दीपों की सौगात सजाई,
लक्ष्मी जी-संग गणपति आए,
हर घर खुशहाली है छाई।

मंगल कलश सजाकर लाई,
आशाओं की ज्योत जलाने आई,
नई उमंगें संग में लेकर माँ लक्ष्मी,
माँ लक्ष्मी भाग्य जगाने आई।

दया, धर्म और सत्य के मोती,
जलाएँ जीवन की नव जोती,
माँ लक्ष्मी इतनी कृपा बरसाएँ,
पूरी कर पाएँ हर एक चुनौती।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

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