कविता

लड़कियों के ऊपर भी गुंडई छाई

क्या जमाना आ गया है
लोकलाज शर्म हया
नहीं है अब कुछ यहाँ
लड़कियों ने ऐसा कर्म किया
लड़कों को भी है मात दिया
कर रही है अब तो गुंडागर्दी
गालिया दे रही है भद्दी से भद्दी
हाथ उठा ठुकाई कर रही है
गुंडई के रास्ते पर कदम धर रही
यह भी देखो अब ढिठ हो रही
लड़कों के नक़्शे-कदम पर चल रही
देखो इनकी ढिठाई
अपने ही साथी की mms बनाई
देखकर लडकियों की हालत यह
सर शर्म से झुक गया यह बात कह
कंधे से कन्धा मिलाते-मिलाते
भटक गयी है ये अपने रास्ते
औरत की करे जो कभी बुराई
सविता करती थी उससे लड़ाई
आज अपनी जाति पर हमें
गर्व से ज्यादा शर्म है
कुछ ऐसी बयार है आयी
लड़कियों के उप्पर भी गुंडई छाई |
++सविता मिश्रा ++

 

*सविता मिश्रा

श्रीमती हीरा देवी और पिता श्री शेषमणि तिवारी की चार बेटो में अकेली बिटिया हैं हम | पिता की पुलिस की नौकरी के कारन बंजारों की तरह भटकना पड़ा | अंत में इलाहाबाद में स्थायी निवास बना | अब वर्तमान में आगरा में अपना पड़ाव हैं क्योकि पति देवेन्द्र नाथ मिश्र भी उसी विभाग से सम्बध्द हैं | हम साधारण गृहणी हैं जो मन में भाव घुमड़ते है उन्हें कलम बद्द्ध कर लेते है| क्योकि वह विचार जब तक बोले, लिखे ना दिमाग में उथलपुथल मचाते रहते हैं | बस कह लीजिये लिखना हमारा शौक है| जहाँ तक याद है कक्षा ६-७ से लिखना आरम्भ हुआ ...पर शादी के बाद पति के कहने पर सारे ढूढ कर एक डायरी में लिखे | बीच में दस साल लगभग लिखना छोड़ भी दिए थे क्योकि बच्चे और पति में ही समय खो सा गया था | पहली कविता पति जहाँ नौकरी करते थे वहीं की पत्रिका में छपी| छपने पर लगा सच में कलम चलती है तो थोड़ा और लिखने के प्रति सचेत हो गये थे| दूबारा लेखनी पकड़ने में सबसे बड़ा योगदान फेसबुक का हैं| फिर यहाँ कई पत्रिका -बेब पत्रिका अंजुम, करुणावती, युवा सुघोष, इण्डिया हेल्पलाइन, मनमीत, रचनाकार और अवधि समाचार में छपा....|

One thought on “लड़कियों के ऊपर भी गुंडई छाई

  • विजय कुमार सिंघल

    हा…हा…हा… सही बात, बहिन जी! आजकल की लडकियां हर बात में लड़कों से मुकाबला कर रही हैं तो गुंडा गिरदी में क्यों नहीं?

Comments are closed.