गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तेरी तस्वीर से बात की रातभर,
खुद में खोई रही खुद से हो बेख़बर।
मैं रहूँ न रहूँ , तुम रहो मुझमें ही
दिल ने चाहा तुम्हें टूटकर इस कदर।
शेष कुछ भी न चाहा तुम्हें चाहकर ,
चाहते चाहती चाह रहे उम्रभर।
दुःख के आँगन में जन्मी, पली औ बढ़ी,
आँसुओ से ही भीगी रही रात हर।
आज तक जिसको चाहा उसे खो दिया
कितना शापित मुकद्दर रहा बेसबर।
तुम मिले, जी उठी जिंदगी फ़िर मेरी,
जी गया फिर पुनः ढह चुका खंडहर।
आ नज़र से छिपा लूँ,नज़र में कही,
लग न पाये नज़र को नज़र की नज़र।
बात दिल की ही दिल में सदा रह गई
कितना बेबश रहा  हर गूँगा अक्षर।
— सफलता सरोज

सफलता सरोज

सफलता सरोज मां- जगदेई बाजपेयी/श्रीमती सरोज पिता- श्री मन्ना लाल शिक्षा- एम.ए. बीएड, एमएड, पीएचडी प्रकाशन- आज, अमरउजाला, पंजाब केशरी, कादम्बरी, वागर्थ, वीणा, लमही, परिंदे, इंडियन ग्लैक्सी, कोमा, नवनिकष, हैलो कानपुर, स्वतंत्र भारत, अक्षरा, बयान, सरस्वती सुमन, अभिव्यक्ति आदि पत्र-पत्रिकाओं में लेख कहानियों, कवितायें, साक्षात्कार का सतत प्रकाश्न संपादन- हमारे सपनों की उड़ान, नग्न मंच है नग्न नृत्य है, नवनिकष का नीरज विशेषांक, बयान का शिक्षा विशेषांक पुरस्कार- राष्ट्रभाषी, राष्ट्रगौरव, पत्रकारश्री की उपाधि पता- चैबेपुर, कानपुर नगर 201203 ईमेल - unnatisafalta@gmail.com