कविता

डिस्को की डिस्क

डिस्को की डिस्क (कविता) यू.ट्यूब लिंक सहित

गली-गली में जब से गूंजी, डिस्को की आवाज,
युवक-युवतियां लगे थिरकने, चमक उठे सब साज.

धीरे-धीरे लगी बढ़ने जब, डिस्को की डिमांड,
सप्लाई कम होती जाती, बढ़ती जाती और डिमांड.

इसका भी हल खूब निकाला, टेप बनाने वालों ने,
डिस्को दुनिया, डिस्को नशा से, धन लूटा दिलवालों ने.

डिस्को सूट, डिस्को ही चुन्नियां, डिस्को ट्माटर-आलू-प्याज,
पैन भी डिस्को, बर्तन डिस्को, डिस्को लगा कमाने ब्याज.

डिस्को बिंदी, डिस्को चूड़ी, डिस्को चप्पल, डिस्को सैंडल,
नजर जहां तक जाती है बस, डिस्को का ही दिखता स्कैंडल.

डिस्को टी.वी., टेप रिकॉर्डर, डिस्को रेडियो खूब चले,
बच्चों के भी डिस्को नाम ही, सबको लगते बड़े भले.

प्रतिदिन जिसमें जाना होता, उस बस का है डिस्को नाम.
हमको देख खिसकना होता, उसका सबसे पहला काम.

किया कमाल घड़ी डिस्को ने, रोज सुबह रुक जाती है,
शादी की घोड़ी की भांति, फिर चलने लग जाती है.

डिस्को एटी टू, डिस्को स्टेशन, डिस्को बादशाह, डिस्को दीवाने,
आइ एम ए डिस्को डॉन्सर जैसे, खूब चले हैं फिल्मी गाने.

जाने कब पीछा छोटेगा, कम होगा डिस्को का खुमार,
लोग चाहते उन्हें चढ़े तो, केवल डिस्को का ही बुखार.

डिस्को की डिस्क जब खिसकेगी, होगा तब जग का उद्धार,
युवक नया निर्माण करेंगे, पुनः बनेंगे वे खुद्दार.

डिस्को को तब लाज लगेगी, रोएगा कोने में बैठ,
अभी तो इसका राज निराला, निकल जाएगी इसकी ऐंठ.

डिस्को शब्द 40-41 साल पहले पहली बार प्रचलन में आया था. आते ही इसने धूम मचाई थी. 1984 में लिखी गई इस कविता ‘डिस्को की डिस्क’ ने भी बहुत धूम मचाई थी. छात्रों में यह रचना विशेष लोकप्रिय हुई थी और मुझे भी कई बार सुनाने का सुअवसर मिला था.

इस कविता का यू.ट्यूब लिंक

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

One thought on “डिस्को की डिस्क

  • लीला तिवानी

    1979 में रिलीज हुई फ़िल्म ‘कुर्बानी’ से नाजिया हसन की आवाज में देश के सिनेमा प्रेमियों ने पहली बार डिस्को की धुन सुनी और बहुत पसंद किया. उसके बाद तो ‘डिस्को’ शब्द को हाथों-हाथ लिया और तुरंत यह शब्द बहुत लोकप्रिय हो गया. व्यापारियों ने तो इस शब्द को बहुत भुनाया ही, डिस्को-गीतों पर डांस ने अनेक रोगियों के रोगों को भी ठीक कर दिया था. डिस्को के गीतों की धुन ही इतनी मनभावन होती थी कि सुनने वाला थिरके बिना रह ही न सके और यही थिरकना उनके स्वास्थ्य के लिए हितकारी व्यायाम हो गया.

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