कविता

हे भारत के वीर पुत्रो

हे भारत के वीर पुत्रो
जीत लिया तुमने जग सारा
अब जीत लो तुम कोरोना को

बहुत बना लिए परमाणु बम
अब दवा बना कुछ कर दिखाओ
यही समय है ,विश्वगुरु बनने का
दवा बना साबित करने का

थक कर मत बैठो भारत तुम
यहां सिकन्दर हारा है
उठ खड़ा हो चल फिर
इस दानव रूपी कोरोना को हराना है

मत भूलो भारत की गाथा
ये है देश हमारा
जहां हुए है शुश्रुत , चरक जैसे
वीर चिकित्सक बलबाना

हे भारत के वीर पुत्रो
फिर से तू महाभारत कर
इस कोरोना के पंख कतर कर
फिर से तू उठ विश्वगुरू बन कर

हे भारत तू कहा परा है इन वीरानों में
तुझको दुनिया ढूंढ रही है
इस मुश्किल घड़ी कोरोना में
चल बना एक अमोघ अस्त्र
इस कोरोना रूपी रावण के मारण को,
और इस धरती के तारण को ।

— आकर्षण राय