पद्य साहित्य हरितालिका *नूतन गर्ग 20/08/2021 विधा- तांका1.सावन आयोहरितालिका लायोरिमझिम साबरसता सावनमहकता सा मन।2.रंग बिरंगीचूड़ियां खनकतीहाथों में मेरेबंया कर रहीं हैंचहलकदमी सी।3.कर श्रंगारपरी सी लागे नारीधीरज धरसयंम तो बरत पड़े हर पे भारी।मौलिकनूतन गर्ग (दिल्ली)