मुक्तक/दोहा

हमने भी सीखा- 19

मुक्तक

दिल में उतर जाती थीं तेरी बातें
अब तो सुनने की प्रतीक्षा में दिन गुजरता है
दिल को सहलाने में रातें

थोड़ा-सा मुस्कुरा दो,
मन-मयूर नाच उठेगा,
खुशियां खुश हो नृत्य करेंगी,
आनंद भी तब साथी बनेगा.

स्वागत है मन से आपका,
बने रहें दिल में हरदम,
मिले सदा खुशियों का तोहफा,
मान-सम्मान भी पड़े न कम.

धन्यवाद है उस भगवन का,
जिसने जग उपजाया,
धन्यवाद है हर उस जन का, जिसने अपना बनाया
अपनेपन का अनुपम आनंद, मन को हर्षित करता
धन्यवाद करने का मधुरिम, भाव है मन में भरता

 

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244