नूतन तस्वीर
मैं निकल पड़ा हूं बाजारों में अमन – चैन क्रय करने।
भेदभाव के कठिन समय में, सबकी जय जय करने।।
सबकी जय जय जहां नेह के, धागे जोड़े जाते।
ऊंच – नीच की हर खाईं पर, अटल सेतु मुस्काते।।
अटल सेतु जिसने केरल को, काश्मीर से जोड़ा।
समता में बाधक रोड़ों को, बिनु तोड़े ना छोड़ा।।
बिनु तोड़े कब पत्थर की , छाती से सरिता बहती।
कलकल स्वर में सिंधु मिलन की, नई कहानी कहती।।
नई कहानी में टूटेगी, मानव कृत सीमाएं।
आओ, कल के भारत की, नूतन तस्वीर बनाएं।।
— डॉ अवधेश कुमार अवध
