कविता

नूतन तस्वीर

मैं निकल पड़ा हूं बाजारों में अमन – चैन क्रय करने।
भेदभाव के कठिन समय में, सबकी जय जय करने।।
सबकी जय जय जहां नेह के, धागे जोड़े जाते।
ऊंच – नीच की हर खाईं पर, अटल सेतु मुस्काते।।
अटल सेतु जिसने केरल को, काश्मीर से जोड़ा।
समता में बाधक रोड़ों को, बिनु तोड़े ना छोड़ा।।
बिनु तोड़े कब पत्थर की , छाती से सरिता बहती।
कलकल स्वर में सिंधु मिलन की, नई कहानी कहती।।
नई कहानी में टूटेगी, मानव कृत सीमाएं।
आओ, कल के भारत की, नूतन तस्वीर बनाएं।।

— डॉ अवधेश कुमार अवध

*डॉ. अवधेश कुमार अवध

नाम- डॉ अवधेश कुमार ‘अवध’ पिता- स्व0 शिव कुमार सिंह जन्मतिथि- 15/01/1974 पता- ग्राम व पोस्ट : मैढ़ी जिला- चन्दौली (उ. प्र.) सम्पर्क नं. 919862744237 Awadhesh.gvil@gmail.com शिक्षा- स्नातकोत्तर: हिन्दी, अर्थशास्त्र बी. टेक. सिविल इंजीनियरिंग, बी. एड. डिप्लोमा: पत्रकारिता, इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग व्यवसाय- इंजीनियरिंग (मेघालय) प्रभारी- नारासणी साहित्य अकादमी, मेघालय सदस्य-पूर्वोत्तर हिन्दी साहित्य अकादमी प्रकाशन विवरण- विविध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन नियमित काव्य स्तम्भ- मासिक पत्र ‘निष्ठा’ अभिरुचि- साहित्य पाठ व सृजन