परिंदे
वक्त,एतबार और इज्जत,
एक महफ़िल की उम्दा शान है।
इसमें सुकून देने वाली ताकत बनकर,
देती है ख़ूब उमंग और उत्साह भर कर,
हम-सब को हमेशा बनाती महान है।
ऐसे माहौल में रहें तो तकलीफें,
नहीं होंगी यहां।
सफरनामा में बदलाव लाने की,
हरेक पड़ाव पर,
कोशिश बड़ी होगी यहां।
दुःख भरी शाम को,
घर-परिवार में अमन-चैन चैन के लिए,
सहेजनी की कोशिश ठीक नहीं है।
हमें आनन्द और प्रसन्नता होगी ज़रूर,
परन्तु तमाम हसरतें पूरी करने की,
लगातार मेहनत करने की हिम्मत,
बिल्कुल सही नहीं है।
परिंदे घर आंगन में एक सुखद,
अहसास दिलाने की शान है।
हम-सब को इस बात पर,
सही मुकाम पर पहुंचने की जरूरत है,
इसकी वजह से ही,
मिलता सबको सम्मान है।
नज़रों से देखा जाए तो,
परिंदे बहुत कुछ सोचते और सुकून देने की,
तरकीब बताते हैं।
नजदिकियां बढ़ाने की जमात में,
शामिल करना सिखातें है।
— डॉ. अशोक, पटना
