कविता

परिंदे

वक्त,एतबार और इज्जत,
एक महफ़िल की उम्दा शान है।
इसमें सुकून देने वाली ताकत बनकर,
देती है ख़ूब उमंग और उत्साह भर कर,
हम-सब को हमेशा बनाती महान है।

ऐसे माहौल में रहें तो तकलीफें,
नहीं होंगी यहां।
सफरनामा में बदलाव लाने की,
हरेक पड़ाव पर,
कोशिश बड़ी होगी यहां।

दुःख भरी शाम को,
घर-परिवार में अमन-चैन चैन के लिए,
सहेजनी की कोशिश ठीक नहीं है।
हमें आनन्द और प्रसन्नता होगी ज़रूर,
परन्तु तमाम हसरतें पूरी करने की,
लगातार मेहनत करने की हिम्मत,
बिल्कुल सही नहीं है।

परिंदे घर आंगन में एक सुखद,
अहसास दिलाने की शान है।
हम-सब को इस बात पर,
सही मुकाम पर पहुंचने की जरूरत है,
इसकी वजह से ही,
मिलता सबको सम्मान है।

नज़रों से देखा जाए तो,
परिंदे बहुत कुछ सोचते और सुकून देने की,
तरकीब बताते हैं।
नजदिकियां बढ़ाने की जमात में,
शामिल करना सिखातें है।

— डॉ. अशोक, पटना

डॉ. अशोक कुमार शर्मा

पिता: स्व ० यू ०आर० शर्मा माता: स्व ० सहोदर देवी जन्म तिथि: ०७.०५.१९६० जन्मस्थान: जमशेदपुर शिक्षा: पीएचडी सम्प्रति: सेवानिवृत्त पदाधिकारी प्रकाशित कृतियां: क्षितिज - लघुकथा संग्रह, गुलदस्ता - लघुकथा संग्रह, गुलमोहर - लघुकथा संग्रह, शेफालिका - लघुकथा संग्रह, रजनीगंधा - लघुकथा संग्रह कालमेघ - लघुकथा संग्रह कुमुदिनी - लघुकथा संग्रह [ अन्तिम चरण में ] पक्षियों की एकता की शक्ति - बाल कहानी, चिंटू लोमड़ी की चालाकी - बाल कहानी, रियान कौआ की झूठी चाल - बाल कहानी, खरगोश की बुद्धिमत्ता ने शेर को सीख दी , बाल लघुकथाएं, सम्मान और पुरस्कार: काव्य गौरव सम्मान, साहित्य सेवा सम्मान, कविवर गोपाल सिंह नेपाली काव्य शिरोमणि अवार्ड, पत्राचार सम्पूर्ण: ४०१, ओम् निलय एपार्टमेंट, खेतान लेन, वेस्ट बोरिंग केनाल रोड, पटना -८००००१, बिहार। दूरभाष: ०६१२-२५५७३४७ ९००६२३८७७७ ईमेल - ashokelection2015@gmail.com