बारिश में खूबसूरती, अपने सबसे हसीन रूप में नज़र आती है।
बारिश का मौसम फ़ितरत,क़ुदरत, की सबसे ख़ूबसूरत और दिलकश रुतों में से एक है। इस मौसम में ना सिर्फ़ ज़मीन की प्यास बुझती है, बल्कि माहौल में एक नई ताज़गी और ज़िंदगी की लहर दौड़ जाती है। आइए, बारिश के मौसम में फितरी रौनक़, ख़ूबसूरती और जंगलात के माहौल को तफ़सील से जानें।
बारिश का पहला क़तरा गिरते ही सूख़ी ज़मीन से मिट्टी की ख़ुशबू उठती है, जो दिल को सुकून देती है। आसमान पर घने बादल छा जाते हैं, हल्की-हल्की ठंडी हवा चलती है, और हर तरफ़ हरियाली की चादर बिछ जाती है। दरख़्तों के पत्ते धुलकर चमक उठते हैं, फूलों के रंग और गहरे हो जाते हैं। दरिया, तालाब और झरने अपनी पूरी रफ़्तार से बहने लगते हैं, जिससे फितरत का हुस्न कई गुना बढ़ जाता है।
बारिश में खूबसूरती, फितरत अपने सबसे हसीन रूप में नज़र आती है। पानी के क़तरों का टपकना, पत्तों पर मोती जैसी बूंदें, इंद्रधनुष की रंगत, और धुंधलाते पहाड़—ये सब मिलकर एक अजीब-ओ-ग़रीब मन भावन मंज़र पेश करते हैं। खेतों में लहराती फसलें, बच्चों की खिलखिलाहट, और परिंदों की चहचहाहट इस मौसम को और भी ज़िंदा कर देती है। शायर, अफ़्साना निगार और मुसव्विर इसी ख़ूबसूरती से मुतास्सिर होकर अपनी तख़लीक़ात पेश करते हैं।
बारिश के मौसम में जंगल का माहौल सबसे ज़्यादा पुररौनक और हरा-भरा हो जाता है। जंगलों में दरख़्त, पौधे तेज़ी से बढ़ते हैं, बेलें और झाड़ियाँ घनी हो जाती हैं। जंगली जानवरों की सरगर्मियाँ भी बढ़ जाती हैं—हिरन, बंदर, परिंदे वग़ैरह अपनी खास ,तलाश में निकल पड़ते हैं। झरनों की रवानी, पत्तों की सरसराहट, और मिट्टी की ख़ुशबू मिलकर एक पुरसुकून माहौल बनाती है।
बारिश का मौसम ना सिर्फ़ फितरी हुस्न को निखारता है, बल्कि इंसान के दिल-ओ-दिमाग़ को भी ताज़गी और ताक़त से भर देता है। जंगलात की हरियाली, माहौल की पाकीज़गी, और फितरत की बेमिसाल रौनक़—ये सब मिलकर मानसून को एक यादगार तजुर्बा बना देते हैं।
— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह
