बढ़ती उम्र
चेहरे की लकीरें धीरे धीरे बढ़ रही है
नजर भी कमजोर होने लगी है
बालों भी अब सफेद होने लगे है
चलने में भी धीरे धीरे परेशानी होने लगी है
कम बात करने की आदत हो रही है
किसी पर गुस्सा करना भी छोड़ दिया है
खुद को दायरें में रखना सीख लिया है
अब बीते बातें भी भूलने लगे है
प्रभु का स्मरण करना अच्छा लगता है
अब हर रिश्ते को थोड़ा सा समझने लगे है
अपनों रिश्तों से ही डर लगने लगा है
जिन्दगी में अकेलेपन का भय सताने लगा है
अपने ही बच्चे अब दूर होते जा रहे है
जीवन में सफलता के लिए बाहर जा रहे है
धीरे धीरे सब अपने में व्यस्त होते जा रहे है
सबके चेहरे अब बदलते जा रहे है
दिल कहीं बाहर लगता नहीं है
अब अकेलेपन की आदत बना रहे है
खुद को अब ज्यादा वक्त देने लगे है
दुनियां से अब हम कटने लगे है.[….]
— पूनम गुप्ता
