आया सावन झुमके
आया सावन झुमके,आया सावन,
बारिश की ठंडी हवा और बूँदों का स्पर्श,
सावन का मौसम, इश्क़ और मोहब्बत की कहानियों के लिए सबसे खूबसूरत पृष्ठभूमि है।
बादलों की गूंज में आशिक का दिल और भी बेचैन हो जाता है, और माशूक की यादें भीगी फिज़ाओं में कुछ ज़्यादा ही जुनून के साथ नाचती महसूस होती हैं। आशिक इस बरसात में दीवार की ओट में उस माशूक को देखने की तमन्ना रखता है, इस उम्मीद में कि शायद उसकी माशूक भी उन पलों को उसी शिद्दत से महसूस कर रही हो।
आशिक के जज़्बात,
बरसात की हर बूँद उसे उस पहली मुलाकात की याद दिलाती है जब सावन की नमी में उसकी महबूबा से नज़रें मिली थीं।
दिल की गहराइयों में हसरतें पलती रहती हैं।कभी एक झलक देखने की, तो कभी उसकी मुस्कान को महसूस करने की।
मोहब्बत में डूबा आशिक अपनी तन्हाई में उसके नाम की सदा गुनगुनाता है और हर पल उसे अपने करीब महसूस करता है।
माशूक के जज़्बात,
खिड़की से बाहर हो रही बारिश को निहारते हुए वह भी दिल ही दिल में अपने महबूब की यादों में खो जाती है।
बारिश की ठंडी हवा और बूँदों का स्पर्श, उसके मन में कोई अनजानी सी लहर पैदा कर देता है, जिसमें आशिक की आहट सुनाई देती है।
उसका दिल चाहता है कि ये मौसम, ये लम्हा यहीं ठहर जाए,सिर्फ वही और उसकी मोहब्बत रह जाए।इन जज़्बातों का खूबसूरत संगम,सावन में आशिक और माशूक की नज़रें कभी मिलती हैं, कभी फासले रह जाते हैं, लेकिन जज़्बातों की रंगत कभी फीकी नहीं पड़ती। जज़्बातों की आंख-मिचौली, मिलन और जुदाई का दर्द, हर पल को यादगार बना देता है।
बारिश के मौसम में, इश्क़ का रंग और भी गहरा हो जाता है
आँखों की खामोश जुबां, दिल के जज़्बातों को बयां कर जाती है।”
इसी तरह सावन, उम्मीदों और ख्वाहिशों के दीप जलाता है। आशिक और माशूक दोनों अपनी अनुभूतियों की गहराई को बारिश की हर बूँद में महसूस करते हैं।
यही वह मौसम है जो मोहब्बत की हर किस्म को, उसके सबसे खूबसूरत मंज़र तक पहुँचा देता है।
— डॉ. मुश्ताक अहमद शाह
