कविता
यही है वह,
जिसका जन्म मेरे मन में हुआ,
और वहीं उसका विकास भी हुआ।
न किसी ने जाना, न किसी ने सोचा,
मगर आज भी वह
उसी दिन की तरह
मेरे मन में बसा हुआ है।
— अमन्दा सरत्चन्द्र, श्री लंका
यही है वह,
जिसका जन्म मेरे मन में हुआ,
और वहीं उसका विकास भी हुआ।
न किसी ने जाना, न किसी ने सोचा,
मगर आज भी वह
उसी दिन की तरह
मेरे मन में बसा हुआ है।
— अमन्दा सरत्चन्द्र, श्री लंका