पहुंचाई चोट माँ के ही अस्तित्व पर
क्यों? पहुंचाई चोट माँ के ही अस्तित्व पर,
बच्चे को जन्म दिया फिर फेंका ज़मीं पर।
चलती बस में दुनिया में आया वो नवजात,
माँ ने खिड़की से फेंककर किया अपघात।
एक नए-नवेले पिता की भी मारी गई मति,
इतनी क्रूरता में पति-पत्नी की हैं सहमति।
क्यों? पहुंचाई चोट माँ के ही अस्तित्व पर,
बच्चे को जन्म दिया फिर फेंका ज़मीं पर।
यहीं मर गई ममता गया कलेजे का टुकड़ा,
इंसानियत कहाँ जाएं, जाकर रोएँ दुखड़ा।
क्यों? रितिका-अल्ताफ को नहीं पश्चाताप,
अब क्या! समाज करें अपरिपक्वता जाप।
क्यों? पहुंचाई चोट माँ के ही अस्तित्व पर,
बच्चे को जन्म दिया फिर फेंका ज़मीं पर।
ज्ञात हैं कपल बच्चे को पालने में असमर्थ,
शारीरिक सुख की खातीर जान गई व्यर्थ।
कपल की ‘मजबूरी’ कहें या कहें कमज़र्फ़,
अपराध किया हैं क्रूर जीने का क्या? अर्थ।
(संदर्भ-परभणी में माँ ने अपनी ममता का ही गला घोंटा।)
— संजय एम तराणेकर
