कविता

विशाल छत के नीचे

कहां से आती है हवा वह
मन में फुरती लाती है हर बार
चलता हूं तेज से तेज
दुनिया के हर कोने में हल्के से
अपना कदम लेता हूं मैं
बच्चा बनकर कूदता – खेलता हूं
खो जाता हूं मैं अपने आपको
विशाल छत के नीचे ।

दुनिया बदलती है देखता हूं
जगत का हर व्यवहार
अजीब सा लगता है मुझे
कौन सा रहस्य वह
छिपा हुआ है इस जीवन यात्रा में !
जीवों की हर चेष्टा मुझे
सोचने को मजबूर करता है
हर पौधे में नये पल्लवों की आशा में
आंख बिछाकर देखता हूं
हर इंसान अपनी अस्मिता लेकर
नये कदम लेने का सपना
मेरा है इस मानव जग में ।

पी. रवींद्रनाथ

ओहदा : पाठशाला सहायक (हिंदी), शैक्षिक योग्यताएँ : एम .ए .(हिंदी,अंग्रेजी)., एम.फिल (हिंदी), सेट, पी.एच.डी. शोधार्थी एस.वी.यूनिवर्सिटी तिरूपति। कार्यस्थान। : जिला परिषत् उन्नत पाठशाला, वेंकटराजु पल्ले, चिट्वेल मंडल कड़पा जिला ,आँ.प्र.516110 प्रकाशित कृतियाँ : वेदना के शूल कविता संग्रह। विभिन्न पत्रिकाओं में दस से अधिक आलेख । प्रवृत्ति : कविता ,कहानी लिखना, तेलुगु और हिंदी में । डॉ.सर्वेपल्लि राधाकृष्णन राष्ट्रीय उत्तम अध्यापक पुरस्कार प्राप्त एवं नेशनल एक्शलेन्सी अवार्ड। वेदना के शूल कविता संग्रह के लिए सूरजपाल साहित्य सम्मान।