कविता

आविष्कार हूं मैं

मुझमें आंसू की जो धारा है
वह एक दिन प्रवाह बनकर
फूट निकल आएगी बाहर
शक्ति पुंज हूं मैं बेकार नहीं
चुप नहीं हूं निरंतर बोलता हूं
अपने आपसे कयी नयी बातें
अपमान की आग है अंदर
समर्पण की महक है भरपूर
कितना भीगा था मैंने
अपमान की उस झड़ी में
सीखा है मैंने कई पाठ रे,
मेरा हर कदम एक साहस है
संप्रदाय के विरोध में सवाल है
रूकी नहीं वह दौड़ मेरे अंदर
पूरी शक्ति बटोर कर
एकाग्र चित्त में संजोया कर
निकलता था विचारों की वीथी में
नहीं डर है किसी का आज
शांति – क्रांति की राहों में
इस मानव जग में कांति हूं
अपने आप में एक आविष्कार हूं ।

पी. रवींद्रनाथ

ओहदा : पाठशाला सहायक (हिंदी), शैक्षिक योग्यताएँ : एम .ए .(हिंदी,अंग्रेजी)., एम.फिल (हिंदी), सेट, पी.एच.डी. शोधार्थी एस.वी.यूनिवर्सिटी तिरूपति। कार्यस्थान। : जिला परिषत् उन्नत पाठशाला, वेंकटराजु पल्ले, चिट्वेल मंडल कड़पा जिला ,आँ.प्र.516110 प्रकाशित कृतियाँ : वेदना के शूल कविता संग्रह। विभिन्न पत्रिकाओं में दस से अधिक आलेख । प्रवृत्ति : कविता ,कहानी लिखना, तेलुगु और हिंदी में । डॉ.सर्वेपल्लि राधाकृष्णन राष्ट्रीय उत्तम अध्यापक पुरस्कार प्राप्त एवं नेशनल एक्शलेन्सी अवार्ड। वेदना के शूल कविता संग्रह के लिए सूरजपाल साहित्य सम्मान।