कविता

पंडित जी

पंडित जी ज़रा हाथ देखकर बताना हमारा हाल,
आजकल के बच्चे नहीं सुनते बात हम हैं बेहाल।
बेटे की कुंडली पे ग्रह बहुत ही लगता छाए हैं।
भूल गए सब कोई संस्कार,क्या दिन आए हैं।
ज़िम्मेदारी न उठाते कोई बस पार्टियों में जाते हैं,
मोज मनाते, फोन चलाते और गाड़ी दौड़ाते हैं।
माँ बाप हैं हम चिंता तो इनकी हमें सताएगी,
पर ये बात इनको कहाँ से समझ आएगी।
पढ़ाई,नौकरी,कब कैसे सब सही होगा बताइए,
न हो योग कोई तो हमें कोई उपाय ही समझाइए।
पंडित जी मुस्कुराए… कुंडली देख कर फरमाए….
सुनिए यजमान, न हो परेशान !
मन चंचल है इनका अभी , सुनते नहीं किसी की भी,
पर मत घबराइए , गुरु इनका सही राह दिखाएगा जी।
चिंता छोड़ घर जाइए,बेटे को प्यार से समझाइए,
सब सही होगा ,थोड़ा वक्त बच्चों संग भी बिताइए।
जो आप करेंगे,वहीं ये सीखेंगे,घर का माहौल सही हो,
ध्यान रहे कि घर के बड़ों की सेवा आप ने भी की हो।
जो बोएंगे वहीं काटेंगे, खुशियां दिजिए खुशियां पाइए।
खुद पर भी गौर फरमाइए और कर्मों को शुभ बनाइए।

— कामनी गुप्ता

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |