‘शेर बच्चों’ की माँ सावित्री अम्मा
अस्सी ‘शेर बच्चों’ की हैं सावित्री अम्मा,
जैसे शेर, बाघ, तेंदुए के लिए ही जन्मा।
बनेरघट्टा पार्क 20 साल से करती काम,
दर्जा दिया जाता शेरों की माँ उन्हें नाम।
शेर-चीते के बच्चे की माँ उसे छोड़ देती,
तब उसे सावित्री अम्मा उन्हें संभालती।
वे अस्सी शावकों को जिंदगी हैं दे चुकी,
खुद की जिंदगी इनके नाम है कर चुकी।
हाथ से दूध पिलाना एवं खाना खिलाना,
उनका रोज का काम है साथ में खेलना।
पति का अवसान उनके स्थान पे नौकरी,
साफ-सफाई करती हैं हाथ लिए टोकरी।
जानवरों का लगाव देखते उनकी तैनाती,
‘वेटनरी अस्पताल’ में कर बनी वो साथी।
ड्यूटी पे आते ही उनकी तरफ दौड़ पड़ते,
शावक के प्रेम और आलिंगन को तरसते।
जब शावक बड़े होते जंगल में छोड़े जाते,
सावित्री अम्मा रोती वे प्रेम से वंचित पाते।
— संजय एम तराणेकर
