स्वतंत्रता न बने स्वच्छंदता
आजादी के मायने क्या हैं,
जीवन हो ओजपूर्ण बयार,
ओज-बिना जीना भी क्या जीना,
ओजहीनता पराधीनता का सार।
आधुनिक बनो सोच से,
भूलो मत अपने सुसंस्कार,
ये ही तो हैं अनमोल थाती,
विस्मित है सारा संसार।
जीवन की सुरम्यता बनी रहे,
स्नेह-प्रेम की सरिता बहे,
शिक्षा की आड़ में फूहड़ न बनें,
मानवता बरकरार रहे।
प्रेममय हो अपना परिवार,
सपने सबके हों साकार,
पद-पढ़ाई का घमंड न हो,
उद्दंडता न पाए आकार।
बेटे-बेटी में रहे समानता,
स्वतंत्रता न बने स्वच्छंदता,
सोच आधुनिक भले ही हो,
बनी रहे पर आध्यात्मिकता।
— लीला तिवानी
