बाकी सब कुछ ठीक है
हिंदू मुस्लिम लड़ रहे हैं बाकी सब कुछ ठीक है
बेगुनाह कुछ मर रहे हैं बाकी सब कुछ ठीक है
जो थे पहरेदार उनकी ही लगाई आग में
घर हमारे जल रहे हैं बाकी सब कुछ ठीक है
लूट के जनता को अपने मुल्क के कुछ हुक्मरान
अपनी जेबें भर रहे हैं बाकी सब कुछ ठीक है
कहीं पे सूखा पड़ा हुआ है कहीं बाढ़ आने में है
कहीं पे बादल फट रहे हैं बाकी सब कुछ ठीक है
यूं तो कुछ बाकी नहीं तेरे चले जाने के बाद
फिर भी तुझसे कह रहे हैं बाकी सब कुछ ठीक है
— भरत मल्होत्रा
