क्यों? हम हो जाए ‘बलिहारी’
क्यों? हम हो जाए आज इनपे ‘बलिहारी’,
इतना क्रिकेट का आनंद हम पर हैं भारी?
‘पहलगाम’ आतंकी हमले का गुस्सा नया,
पाक से क्रिकेट क्या? आवश्यक हो गया?
याने द्विपक्षीय मुकाबले में हिस्सा न लेगा,
लाइव सभी देखेंगे यह दु:ख कैसे मिटेगा।
नई नीति में तटस्थ स्थान पर नहीं खेलेगा,
एशिया कप में खेलने से ना रोका जाएगा।
अपने ‘जज्बातों’ को वह कैसे रोक पाएगा,
ऑपरेशन सिंदूर से खुश भारतीय आएगा?
जो देश यहीं कहता हो ट्रक पत्थर से भरा,
‘खिलाड़ियों’ को क्यों? भेजें बताओ जरा?
सुन लो सरकार ऐसा तो ना करो व्यवहार,
हम ‘भारतवासी’ लगा रहे हैं आपसे गुहार।
अब ना खेलों पाक के साथ कोई भी मैच,
उससे तो न पकड़े जाएंगे शांतिरूपी कैच।
हमें फिर ना करना पड़े सिंदूरी बल्लेबाजी,
नापाक इरादे हैं उसके! देश बड़ा है पाजी।
(संदर्भ – बलिहारी आतंक पर क्रिकेट भारी?)
— संजय एम तराणेकर
