गजल
हो तुम्हारा हाथ, मेरे हाथ में, तो साथ मिले।
चूम लूं लबों को तुम्हारे, तो कोई बात मिले।
बदन लिपट जाए तुमसे, कोई आह ना हो,
तब जाकर,दो दिलों के ,कुछ जज्बात मिले।
ढूंढता इश्क में सुकून है, हर आम आदमी यहां
जिसे तुम मिलो, उसे दुनिया की,हर कायनात मिले।
हवाएं चल रही ये बूंदे साथ लेकर अपने,
इश्क के मौसम इश्क की वो बरसात मिले।
— हेमंत सिंह कुशवाह
