कविता

हरतालिका का त्योहार

मेंहदी की महक, हरी चूड़ियों की खनक,
सुहाग का सिंदूर, मंगलसूत्र का उपहार,
हरियाली साड़ी, नैनों में खुशियों की चमक,
शिव-पार्वती का संगम, भक्ति का त्योहार।

व्रत की थाली में श्रद्धा-विश्वास की सौगात,
हर लाली में अनूठे प्रेम के सौंदर्य का सार,
झूला झूले सखियों-संग, गीतों की बरसात,
हल्की-हल्की-सी है सावन की वर्षा की फुहार।

वर्षा की रिमझिम धरती पर छाई हरियाली,
मन में सौभाग्य की प्रीति की उमंग छाई,
तीजों मात की पूजा कर झूमे-नाचे आलि,
रंगीन फिजाएं, महकी हवाएं, बहार आई।

सोलह श्रृंगार कर मनाए गोरी तीज-त्योहार,
शिव-पार्वती के विवाह के मंगल गीत गाए,
सुख-समृद्धि की कामना का मन में संचार,
धानी चूनर ओढ़ धरा हरतालिका तीज मनाए।

— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244