हरतालिका का त्योहार
मेंहदी की महक, हरी चूड़ियों की खनक,
सुहाग का सिंदूर, मंगलसूत्र का उपहार,
हरियाली साड़ी, नैनों में खुशियों की चमक,
शिव-पार्वती का संगम, भक्ति का त्योहार।
व्रत की थाली में श्रद्धा-विश्वास की सौगात,
हर लाली में अनूठे प्रेम के सौंदर्य का सार,
झूला झूले सखियों-संग, गीतों की बरसात,
हल्की-हल्की-सी है सावन की वर्षा की फुहार।
वर्षा की रिमझिम धरती पर छाई हरियाली,
मन में सौभाग्य की प्रीति की उमंग छाई,
तीजों मात की पूजा कर झूमे-नाचे आलि,
रंगीन फिजाएं, महकी हवाएं, बहार आई।
सोलह श्रृंगार कर मनाए गोरी तीज-त्योहार,
शिव-पार्वती के विवाह के मंगल गीत गाए,
सुख-समृद्धि की कामना का मन में संचार,
धानी चूनर ओढ़ धरा हरतालिका तीज मनाए।
— लीला तिवानी
