शिमला – यहां मर्मस्पर्शी मौसम सौंदर्य के गीत गाता है

चंडीगढ़ से आप को कालका जाना पड़ेगा। कालका से दीर्घ पहाड़ियों का मंगलाचरण होता है। कालका से शिमला जाना पड़ता है। आप टैक्सी बस द्वारा तथा बाई ऐयर वायु भी जा सकते हैं। यहां का एअरपोर्ट जब्बरहाटी है, जो शिमला से लगभग 23 किलोमीटर दूर है। कालका से छोटी ट्रेन भी चलती है, अगर आप बच्चों के साथ हैं तो फिर खूब मज़ा लें द्वाय ट्रेन का। कम चौढ़ाई वाली रेलवे लाईन, छोटे-छोटे खिलौनें जैसे रेल के डिब्बे। आहिस्ता-आहिस्त पर्वर्तो पर वल खाती चढ़ती जाती यह ट्रेन, एक सरकम के खेल जैसी लगती है। ट्रेन से भव्य दृश्य देखने का मज़ा आ जाता है। यह छोटी ट्रेन कालका से चलती है। दिन में दो तीन ट्रेन चलती है। हिचकोरे खाती टेनकृजब घुमावदार रास्तों से हो कर गुजरती है तो आनंद सा आने लगता है। एक तरफ ऊंचे पर्बत और दूसरी तरफ गहरी खड्डें देख कर मन प्रसन्न हो जाता है। खड्डें इतनी गहरीं कि ट्रेन पर शिमला जाने में, समय कुछ ज़्यादा लगता है जब कि बस तथा टैक्सी या अपनी गाड़ी पर कम समय लगता है, कालका से लगभग तीन घण्टे लग ही जाते हैं।

कालका-शिमला रेलवे लाईन ट्रेन का इतिहास यह है कि कालका शिमला रेलवे 1903 में भारतीय मांऊटेन रेलवे में जुलाई 10, 2008 को शमिल की गई। जो कि यूनेस्को द्वारा जारी विश्व घरोहर सूची पर आधरित है। इस सुची में शमिल होने पर कालका-शिमला रेलवे के वैखिक मूल्यों की पुष्टि होती है जो कि सुपूण मानवता से सम्मान तथा संरक्षण के पात्र होते हैं।

कालका-शिमला रेलवे हिमालयन मांऊटेन के विकास में विशिष्ट तकनीकी उपलब्धियों को प्रस्तुत करती है जो कि इस की लम्बाइ, ऊँचाई तथा दुर्गम क्षेत्रों के कारण है, हालाकि यह अत्यंत विषम मुशिकल जलवयु, परिस्थितियों में चलती है। कालका से शिमला कत 96 कि.मी. लम्बी लाईन, 102 सुरंगों, 988 पुलों एवं 97 घुमाओं घुमाओ जिन में कई 46 डिग्री के नीव्र घुमाव हैं, से हो कर गुजरती है। शहर बडोग के निकट 1143 मीटर सब से लम्बी सुरंग है। कनोह के निकट 4 मंज़िला स्टोन आर्च गैलरी ब्रिज न.541 है जो कि इंजीनियरिंग का अद्भुत मूलभूत ढांचे का रख रखाव बहुत ही अच्छी दशा में किया गया है जो कि उदाहरणीय तथा रेलवे की विश्वसनीयता के अनुरूप् है।

अच्छी दशा में किया गया है जो कि उदाहरणीय तथा रेलवे की विश्वसनीयता क अरूप है। के.एस.आर. के स्टेशन लम्बी सुरंगे, बहुमंजिले पुल, उत्कृष्ट तथा सर्वभौगिक है और इन पर हो कर छोटी गाड़ी में यात्रा करना सुखद तथा आंनददायक होने के साथ-साथ रोमांचक, मनोहारी तथा बीते युग की यादों को ताज़ा करने वाला है। विश्व घरोहर में इस लाईन के शामिल करने से सतन संभव विकास, समाज, पर्यावरण, पर्यटन और मूलभूत सस्थागत ढांचे को बनाए रखने के लिए उत्साहित करता है। माल रोड पर ही ब्रिटिश काल की अनेकानेक सुन्दर इमारतें है। यहो पर पोस्ट आफिस, मौक लाइब्रेरी, क्राइस्ट चर्च, टाऊन हाल, गेयटी थिएटर, सुविधा उपलब्ध बाज़ार, प्राचीन होटल, दुकानें तथा आधुनिक होटलों की भरमार है। देश-विदेश के पर्यटक आनंद लेते है।

नीचे से ऊपर आने के लिए इलैक्ट्रानिक लिफट का प्रबंध है। जो लोग ज्ंयादा नहीं चल सकते उन के लिए लिफट अत्यंत सुविधजनक है। यहां पर महात्मा गांधी जी भव्य प्रतिमा के ऊपर लगी बड़ी छतरी भी लोगों को जंचती है। माल रोड पर जब अधिक बर्फ पड़ती है तो ऐसे में पर्यटकों की सुविधा के लिए शैड बने है जिन में लम्बे बैंच रखे हुए है। पर्यटक यहां बैठ कर मौसम और जन्नत का आनंद उठाते है।

शिमला में कई बाज़ार है। यहां से हिमाचल प्रदेश के कई प्रसिद्ध मैगज़ीन हिन्दी, अंग्रेजी एवं उर्दू मेे निकलते है। स्वास करके बिपाशा मैगज़ीन बहुत मशहुर है। यहां कलाकार, लेखक तथा फोटोग्राफर भी खयाति प्राप्त है।
शिमला का सबसे ऊचा स्थान है जाखु हिल्स। यहां पहाड के शिखर पर प्रसिद्ध जाखु पन्दिर शोभनीय है। यहा मन्दिर शहर से लगभग दो किलोमीटर ऊपर है। यहां बंदरों की राजधानी है। बंदर बहुत समझदार और नेताओं की लरह चुस्त फुर्त हैं। मौका देखते ही खाने पीने की वस्तु छीन कर छु मंत्र हो जाने है।
यहां पर है भव्य हिमाचल स्टेट म्यूजियम, यहां हिमाचल सास्कृति की अनेक कलाकृतियां हैं। यहां ब्रिटिश काल क इमारतों में कई संग्रहलय हैं। कढ़ाई-कपड़े, पत्थर की सुन्दर मूर्तियां, पहाड़ी पेंटिंगस, हिमाचल हस्त शिलप, हिमाचल वस्त्र आदि कलाकृकियां मौजूद हैं। साथ ही इंडियन इंस्टट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज और वाईसरीगल लौज, हिमाचल टूकिज़म आदि मौजूद हैं। किसी न किसी फिल्म की शूटिंग होती रहती है।
शिमले के समीप कई स्थान देखने योग हैं। हिमाचल टूरिज़्म विभाग से आस पास की जानकारी लोकर ही जाएं। मौसम के अनुसार छतरी, बैटरी, जूते, गर्म वस्त्र, पानी की बोतल, दवाएं रखें तथा कम खाएं।
शिमला एक छाटे से गांव शीमला से प्रचलित हुआ। ब्रीटिशं आफ़िसर ने इस स्थान का आवीषकार किया। अंग्रेज़ों ने इसे अपनी ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया हुआ था। शिमला एक प्राकृतिक शक्ति का नाम है। यहां जयंती शक्ति की कृपा है। सुन्दर दृश्य, मनमोहने पर्वत, हृदय स्पर्शी मौसम, बादलों की कृपा, बर्फ के दृश्य, ऊँचे वृक्ष, हरिआली, खिलते, खिलते सूनम आदि देव लोक हैं शिमला में।
— बलविन्दर बालम
