स्वास्थ्य ,सबसे अच्छा मित्र और हर रिश्ते की असली बुनियाद है
मनुष्य के जीवन में यदि किसी साथी को सबसे अधिक महत्वपूर्ण, सच्चा और स्थायी माना जाए तो वह है उसकी अच्छी सेहत। स्वस्थ शरीर और शांत मन वह नींव हैं जिन पर जीवन की सारी उपलब्धियाँ, सुख और रिश्तों का सौंदर्य टिका होता है। इंसान जब निरोग और ऊर्जावान होता है, उसकी मुस्कान में आत्मविश्वास निकलता है, उसके संबंधों में आत्मीयता बनी रहती है और जीवन की हर चुनौती का सामना सहजता से किया जा सकता है। परन्तु जैसे ही शरीर या मन की सेहत डगमगाने लगती है, सबसे पहले असर मनुष्य के व्यवहार और उसके आसपास के लोगों पर दिखना शुरू हो जाता है। बीमारी केवल शारीरिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहती, वह मन, सोच और हर रिश्ते को प्रभावित करने लगती है।
आज का समय चुनौतियों से भरा हुआ है। आधुनिकता की तेज़ दौड़, भागदौड़ भरी दिनचर्या, असंतुलित भोजन, मानसिक दबाव, और बढ़ता प्रदूषण — ये सब मिलकर हमें जन-स्वास्थ्य के संकट के करीब पहुँचा रहे हैं। पहले के ज़माने में लोग प्राकृतिक जीवनशैली अपनाते थे, श्रम प्रधान कार्य करते थे, ताजे और पौष्टिक आहार लेते थे, जिससे स्वास्थ्य भी मजबूत रहता था और परिवार का वातावरण भी प्रेमपूर्ण बना रहता था। अब जीवन मशीनों और मोबाइल स्क्रीनों तक सिमटता जा रहा है, फास्ट फूड और तैयार भोज्य पदार्थों ने हमारी रसोई और शरीर दोनों को प्रभावित किया है। नतीजतन, शारीरिक दुर्बलता, मानसिक तनाव और सामाजिक दूरियाँ बढ़ती जा रही हैं। जब स्वास्थ्य बिगड़ता है तो स्वभाव में चिड़चिड़ापन, निराशा, कुंठा और नकारात्मकता घर करने लगती है, साथ ही इंसान अपने रिश्तों से भी अनजाने ही दूर होता जाता है।
यह भी देखा जाता है कि बीमारी के समय व्यक्ति प्रायः खुद में सिमट जाता है, उलझन और चिंता से घिरा हुआ सा महसूस करता है, जिससे परिजनों के प्रति उसका व्यवहार भी बदलने लगता है। कई बार आर्थिक समस्याएँ, इलाज का बोझ और असहायता की भावना भी परिवार में मनमुटाव और रिश्तों में खटास ले आती है। धीरे-धीरे वे गहरे संबंध भी निरर्थक से लगने लगते हैं, जिन्हें कभी जीवन की सबसे बड़ी पूँजी समझा जाता था।
इसलिए सबसे जरूरी है कि हम स्वास्थ्य के महत्व को समझें और उसे अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता मानें। दिनचर्या में नियमित व्यायाम, संतुलित एवं ताजा भोजन, पर्याप्त नींद, तनावमुक्त जीवनशैली और सकारात्मक सोच को अनिवार्य रूप से शामिल करें। यही आदतें आगे चलकर रिश्तों में भी मिठास बनाए रखने में सहायक सिद्ध होती हैं क्यूंकि स्वस्थ व्यक्ति ही वास्तव में आनंदित रह सकता है और उसी की प्रसन्नता उसके आसपास के माहौल में भी संचारित होती है। याद रखें कि धन, यश, प्रतिष्ठा अथवा पदवी — सभी कुछ क्षणभंगुर हैं, परंतु वास्तविक सुख व संतुष्टि केवल स्वस्थ तन और मन में ही बसती है।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह संदेश अत्यंत प्रासंगिक है कि स्वास्थ्य को नजरअन्दाज करना जीवन के मूलाधार को कमज़ोर करना है। यदि हम चाहते हैं कि हमारे संबंध मजबूत रहें, समाज में प्रेम, सहयोग और सद्भाव बना रहे तथा जीवन सच्चे अर्थों में खुशहाल हो तो इसके लिए हमें सबसे पहले अपनी और अपने परिवार की सेहत को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।स्वास्थ्य ही जीवन की सबसे बड़ी पूँजी, सबसे अच्छा मित्र और हर रिश्ते की असली बुनियाद है।
— डॉ. मुश्ताक अहमद शाह
