हम भी गणेश चतुर्थी मनाएं
गणपति जी का रूप निराला,
सूंड-सी नाक है गज मुख वाला,
चारभुजाधारी गणदेवा,
मूषक वाहन पेट विशाला।
आओ माटी के गणेश बनाएं,
हम भी गणेश चतुर्थी मनाएं,
सूप सरीखे कान हैं उनके,
सुनें अच्छा, थोथा पल में उड़ाएं।
बल-बुद्धि-विद्या-ज्ञान-प्रदाता,
बल-बुद्धि-विद्या-ज्ञान हमें दो,
सेवा-सरलता-धीरज-शांति,
ऋद्धि-सिद्धि-नवनिधि-धन दो।
हे गौरीशंकर-सुत आओ,
कर दो जन-जन का कल्याण,
बल-बुद्धि-विद्या-आनंद का प्रभु,
दे दो हमको शुभ वरदान।
— लीला तिवानी
